मेरे बारे में

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बड़े आसान से शब्दों में लिख डाली कहानी है
जो मेरे साथ है गुजरा वही मेरी जुबानी है
मैं तुमसे क्या कहूँ मैं ही नहीं समझा मोहब्बत
को मेरे ऐहसास के सावन में बस यादों का पानी है

मंगलवार, अगस्त 30

गम-ए-मोहब्बत(pages of love)


लिखा है गम मोहब्बत पर मिला भी कुछ नहीं हमको
सभी पढ़कर बढे आगे गिला भी कुछ नहीं हमको
मेरी तकदीर में ही हर तरफ एक बस वीरानी है
मिली ठोकर ज़माने से खला भी कुछ नहीं हमको
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