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बड़े आसान से शब्दों में लिख डाली कहानी है
जो मेरे साथ है गुजरा वही मेरी जुबानी है
मैं तुमसे क्या कहूँ मैं ही नहीं समझा मोहब्बत
को मेरे ऐहसास के सावन में बस यादों का पानी है

गुरुवार, अगस्त 25

जबसे हुआ है प्यार ओ कन्हैया

जन्म अस्ट्मि की सभी को हार्दिक शुभ कामनाएँ

जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया
तब से कठिन भई हमरी उमरिया
कितने जतन करु तुमसे मिलन के खातिर
लगत है जैसी सूनी हमरी डगरिया
जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया.

सुनो राधा तुम हो हमरी नजरिया
तुम्ही को सोचूं मैं सुबह शामरिया
कैसे तुमको बताऊँ कैसे ये समझाऊँ
जल्दी ही आऊंगा मैं वृन्दावन नगरिया
जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया.

बात न बनाओ सुनो करो सीधी बतिया
हमको सताने में न आहे तुम्हें लजिया
जो भी मिले कहे तू सारे गोकुल फिरे 
सबसे मिलत हो हमसे प्यारी तुम्हें गैया
जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया.

मेरे मन का एक तू ही है बसैया
मैं हूँ बस तेरा और तेरा ही सांबरिया
अब मान भी जाओ न मुझको सताओ
वरना निकली जाए यहाँ हमरी भी जनिया
जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया.

मान गयी लो तुमरी खातिर ओ रसिया
का करें तुम्ही में रहे मोरा जिया
चाहे हमको सताओ चाहे हमे तड़पाओ
तुमरे ही रहेंगे हम सातों जनमिया
जबसे हुआ है तुमसे प्यार ओ कन्हैया.




6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 26 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-08-2016) को "जन्मे कन्हाई" (चर्चा अंक-2446) पर भी होगी।
    --
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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