संदेश

muktak लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरी दुआओं को असर

मेरी दुआओं को असर नहीं मिलता  खुदके लिए ही अक्सर नहीं मिलता   मेरे लिखने को जिगर नहीं मिलता उस रोज वहाँ तू अगर नहीं मिलता   मैंने ढूंढे हैं बहुत समझने वाले यहाँ इन गीतों को समझे पर नहीं मिलता जो दिल में उतरे आखिरी मोड़ तक  यहाँ वहाँ अब वो नजर नहीं मिलता   इश्क बिकता है बाजार में सुना था मैंने खोजा लेकिन इधर नहीं मिलता कई रूह भी नीलाम सरेआम हो गयी मैं भी लेता पर तू उधर नहीं मिलता   

कोई कल कह रहा था(मुक्तक)

चित्र
कोई कल कह रहा था तुम मेरी ही बात करते हो ज़माना बीत गया किस्सों को फिर भी याद करते हो जो तुम्हारे सामने था वो तुमने देखा नहीं तब तो अब तन्हाई में रो रो कर खुद को बर्बाद करते हो. जो ये पैगाम मैंने पालिया तुमसे मैं कहता हूँ चले आओ मेरे ही पास ये उम्मीद करता हूँ मैं सबकुछ भूल जाऊंगा मोहब्बत में तलक अब भी तेरे आँसू की कीमत आज भी बस मैं समझता हूँ. तेरे खोने में जो खोना है वो मेरा ही खोना है तुम्हारे साथ जो गुजरेगा वो मेरा भी होना है जुड़ी हैं इस तरह साँसे लिपट कल की तरह अब भी मेरे दिल के महल में आज भी तेरा ही कोना है. मुझे बर्बाद करके भी कहीं आबाद रहते हो सुना था कल किसी से कि जिन्दाबाद रहते हो ये कैसी रहमतें दि हैं मोहब्बत के फ़साने में मैं सब कुछ भूल भी जाऊँ मगर तुम याद रहते हो.