संदेश

deep लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुफ्तगू

 वो जब तुम बात करने लगती होना मुझसे     तो खिल उठता है मेरा ये मायूस चेहरा           और ये दिल दौड़ने लगता है               कल्पनाओं के घोड़ों पर              नदी पहाड़ जंगल झरने    फिर तुम जब चली जाती हो यूंही बेरुखी से तो सो जाता है दिल यथार्थ के उदास बिस्तर पर

एक पगली याद बहुत ही आती है

चित्र
जब यारों की महफ़िल में अचानक छिड़े चर्चा मोहब्बत बाली, या फिर नुक्कड़ बस्ती दूर गली में कोई दिखती है भोली भाली, करूँ जतन पर,दिल पर मेरे छुरियाँ सी चल जाती हैं सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है एक नाम जो,तीरथ था मेरा एक गली जो,काशी मथुरा थी अब कहाँ रहे वो मंजर सारे हर ख़्वाहिश भी,कतरा-कतरा थी भूले भटके कभी कहीं से उसकी तस्वीर अगर मिल जाती है सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है प्रेम प्रसंग पर,कोई फ़िल्म हो या मम्मी दीदी वाले नाटक वधु चरित्र वाली हर लड़की खोले अतीत वाले फाटक तब हृदय वेदना,और अश्क़ों को झूठी,मुस्कान मेरी छल जाती है सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है पाया था,मैंने भी उसको मन्नतों के लंबे,समर लड़कर हर आहट पर,सजदा था मेरा थामा था उसको,गिर पड़कर अब मैं नहीं!तो फिर कौन? किसको?मेरा हल बनाती है? सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है जज्बातों को जरा सजा दूँ गज़ल कोई बन जाती है सब कहते हैं मैं लिखता हूँ पर अर्थ तो वो ही लाती है नींद सुकून उम्मीदें स्वाहा गर फ़िक्र तेरी पल जाती है सच कहता हूँ,तू पगली मुझको या...

अपने उस गाँव में

चित्र
पीपल की छाँव में अपने उस गाँव में सकरी और उजड़ी पर दिलकश उन राहों में टूटे से घर में जलती दोपहर में छिपते छिपाते दिल के शहर में क्या अब भी कोई सुबह शाम से मिलती है राधा कोई क्या घनश्याम से मिलती है जमुना के कोई मुहाने की दस्तक होती है दिल के किबाड़ों पे अब तक इठलाते मौसम और मोहब्बत के किस्से कब तक अकेले सिलूँ मैं वो हिस्से तुम भी लिखो और मुझको बता दो जेठ की आंधी अब भी क्या तूफ़ान से मिलती है बड़े जतन कर सबरी क्या श्री राम से मिलती है वो मिलजुल के रहना सराफत का गहना हर एक आपदा को सदा साथ सहना वो ईद और दीवाली जो संग संग मनायीं यहाँ खीर पूरी वहाँ सेवइयां थी खायीं यहाँ मुझको वैसा न दिखता समर्पण टूटा हुआ सा अब मेरा है दर्पण वहाँ क्या अब भी गीता कभी कुरान से मिलती है सभी बंधन भूल आरती क्या अजान से मिलती है

अब तू दूर है मुझसे(a poem of memory)

चित्र
अब तू दूर है मुझसे पर मेरे सबसे पास है तू तब भी मेरे लिए खा स था तू अब भी मेरे लिए खास है ये तेरे अनुपम ने भेजा है पैगाम जरुर पढना वो हमेशा तेरे आस पास है मेरा यकीं न हो तो खुद से पूँछ ले मेरा एहसास कराती तेरी हर एक साँस है अब तू दूर है मुझसे पर मेरे सबसे पास है. लिखा है ख़त में मैंने मेरा दिल तू कैसा है क्या जैसा था मेरे साये में अब भी वैसा है क्या कोई चिड़िया तुझे अब भी छेड़ जाती है या तुझे भिगोकर बारिस मुस्कुराती है क्या कोई हवा मेरा नाम लेकर तुझे नहीं सताती है या ख़ामोशी में गुन गुनाता अब भी मेरा एहसास है अब तू दूर है मुझसे पर मेरे सबसे पास है. सुनो वो आम के पेड़ अब भी होंगे क्या उनमें पहले जैसे आम लटकते होंगे कौन खिलाता होगा तुमको अपने हाथों से लाकर क्या अब भी सूखती है छज्जे पर वो प्यारी सी चादर क्या गूंजता नहीं तुम्हारे कानों में मेरा कोई साज है या आज भी वर्तमान से ज्यादा चहेता हमारा इतिहास है अब तू दूर है मुझसे पर मेरे सबसे पास है