मेरे बारे में

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बड़े आसान से शब्दों में लिख डाली कहानी है
जो मेरे साथ है गुजरा वही मेरी जुबानी है
मैं तुमसे क्या कहूँ मैं ही नहीं समझा मोहब्बत
को मेरे ऐहसास के सावन में बस यादों का पानी है

मंगलवार, अगस्त 22

अपने उस गाँव में



पीपल की छाँव में अपने उस गाँव में
सकरी और उजड़ी पर दिलकश उन राहों में
टूटे से घर में जलती दोपहर में
छिपते छिपाते दिल के शहर में
क्या अब भी कोई सुबह शाम से मिलती है
राधा कोई क्या घनश्याम से मिलती है

जमुना के कोई मुहाने की दस्तक
होती है दिल के किबाड़ों पे अब तक
इठलाते मौसम और मोहब्बत के किस्से
कब तक अकेले सिलूँ मैं वो हिस्से
तुम भी लिखो और मुझको बता दो
जेठ की आंधी अब भी क्या तूफ़ान से मिलती है
बड़े जतन कर सबरी क्या श्री राम से मिलती है

वो मिलजुल के रहना सराफत का गहना
हर एक आपदा को सदा साथ सहना
वो ईद और दीवाली जो संग संग मनायीं
यहाँ खीर पूरी वहाँ सेवइयां थी खायीं
यहाँ मुझको वैसा न दिखता समर्पण
टूटा हुआ सा अब मेरा है दर्पण
वहाँ क्या अब भी गीता कभी कुरान से मिलती है
सभी बंधन भूल आरती क्या अजान से मिलती है




बुधवार, जून 7

जितना है याद तुम्हें

जितना अब तक है याद तुम्हें, मैं उतना भूल आया हूँ
तुमने हर राह दिये थे काँटे, मगर मैं फूल लाया हूँ

जिन गलियों की अमर कहानी, जिनकी यादें पानी पानी
कुछ बची है शब्दों में मेरे, उन गलियों की धूल लाया हूँ

कुछ भ्रम थे मेरे टूट गए थे, जब अपने ही रूठ गए थे
जब मैं बदला और वो बदले, कुछ बदले हुए उसूल लाया हूँ

जो ख़त रह गए अनखोले से, जो बोल रहे अनबोले से
जो बाकी है अब तक संदेशे, एसे ही फिजूल लाया हूँ

जहाँ पढ़े थे प्रेम विषय पर, सब वारा था एक विजय पर
एहसासों के ऐसे पावन, मैं यादों के स्कूल लाया हूँ

जितना अब तक है याद तुम्हें, मैं उतना भूल आया हूँ
तुमने हर राह दिये थे काँटे, मगर मैं फूल लाया हूँ

शुक्रवार, सितंबर 2

तुझे जो पालिया हमने(मुक्तक-a sad heart)



तुझे जो पालिया हमने तमन्ना कुछ नहीं हमको
तुझे जो खोदिया हमने गिला भी कुछ नहीं हमको
जो पाया था वो खोया है इसमें अफ़सोस कैसा है
मगर दिल से मेरे पूछो सिला ये क्यूँ मिला हमको.

मैं तेरा हूँ तू मेरी है फिर क्यूँ इनकार करती है
खुदी में चूर है इतना खुदी पर बार करती है
मैं प्यासा हूँ समुन्दर होकर भी इक बूँद का यारो
तू समां ऐ इश्क मैं परवाने को क्यूँ बर्बाद करती है.

जो मेरी आँखों का पानी है मोहब्बत की निशानी है
जो तू छूले तो सागर है जो छलका दूँ कहानी है
मोहब्बत का हर एक पल मेरे दिल में बसा अब तक
इश्क माना गमजदा है मगर फिर भी रूमानी है.

जमाने भर की खुशियाँ फिर तेरे क़दमों में लाया हूँ
तेरे दिल में बसा है जो वही फिर दौर लाया हूँ
मैं तुझसे पूछता हूँ ये बता मेरी खता क्या थी
मैं मिटकर भी तेरी खातिर संबर कर आज आया हूँ.

बुधवार, अगस्त 31

मेरी जाना मेरी जाना(My Love)



मेरी जाना मेरी जाना मैं जब पीछे देखता हूँ
तुम्हारा अक्श बनता है
मैं जब तन्हाइयों में खुदसे ही बातें करता हूँ
तुम्हारा जिक्र चलता है
कोई भीनी सी खुशबु जब हवा में डोलती है
तुम्हारा इत्र उढ़ता है
मैं जब आँखों को अपनी मूंदता हूँ
तुम्हारा रूप खिलता है.

मेरी रातें मेरी रातें जब जब रत जागों में डूब जाती हैं
तुम्हारा दर्द पलता है
मैं जब बीते पलों में झांकता हूँ
तेरी यादों को जब भी तंकता हूँ
दबा जज्बात का खामोश दरिया बह निकलता है
तेरी आवाज तेरी आवाज जब मेरे जहन में गूँज जाती है
मेरा दिल फिर मचलता है॰

सुनो जाना सुनो जाना तुम्हें कैसे बताऊँ
बड़े जतनों से फिर ये दिल संभलता है
मेरी खामोशियाँ मेरी खामोशियाँ
दिल को मेरे जब चीर जाती हैं
मेरी तन्हैयाँ तेरे लिए आँसू हाती हैं
फिजाएँ रूठ जाती हैं हर एक तमन्ना टूट जाती हैं
गर आज भी तू मुझको कही नाराज मिलता है
मेरे जीने में मेरे जीने में तेरी यादों का हर गम है
तुझे खोने का मौसम है
तेरे चेहरे को देखूँ तो मेरा दिल जलता है
मगर सबसे ही ज्यादा मुझको तेरा फ़िक्र खलता है.