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मेरी दुआओं को असर

मेरी दुआओं को असर नहीं मिलता  खुदके लिए ही अक्सर नहीं मिलता   मेरे लिखने को जिगर नहीं मिलता उस रोज वहाँ तू अगर नहीं मिलता   मैंने ढूंढे हैं बहुत समझने वाले यहाँ इन गीतों को समझे पर नहीं मिलता जो दिल में उतरे आखिरी मोड़ तक  यहाँ वहाँ अब वो नजर नहीं मिलता   इश्क बिकता है बाजार में सुना था मैंने खोजा लेकिन इधर नहीं मिलता कई रूह भी नीलाम सरेआम हो गयी मैं भी लेता पर तू उधर नहीं मिलता   

गुफ्तगू

 वो जब तुम बात करने लगती होना मुझसे     तो खिल उठता है मेरा ये मायूस चेहरा           और ये दिल दौड़ने लगता है               कल्पनाओं के घोड़ों पर              नदी पहाड़ जंगल झरने    फिर तुम जब चली जाती हो यूंही बेरुखी से तो सो जाता है दिल यथार्थ के उदास बिस्तर पर

अपने उस गाँव में

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पीपल की छाँव में अपने उस गाँव में सकरी और उजड़ी पर दिलकश उन राहों में टूटे से घर में जलती दोपहर में छिपते छिपाते दिल के शहर में क्या अब भी कोई सुबह शाम से मिलती है राधा कोई क्या घनश्याम से मिलती है जमुना के कोई मुहाने की दस्तक होती है दिल के किबाड़ों पे अब तक इठलाते मौसम और मोहब्बत के किस्से कब तक अकेले सिलूँ मैं वो हिस्से तुम भी लिखो और मुझको बता दो जेठ की आंधी अब भी क्या तूफ़ान से मिलती है बड़े जतन कर सबरी क्या श्री राम से मिलती है वो मिलजुल के रहना सराफत का गहना हर एक आपदा को सदा साथ सहना वो ईद और दीवाली जो संग संग मनायीं यहाँ खीर पूरी वहाँ सेवइयां थी खायीं यहाँ मुझको वैसा न दिखता समर्पण टूटा हुआ सा अब मेरा है दर्पण वहाँ क्या अब भी गीता कभी कुरान से मिलती है सभी बंधन भूल आरती क्या अजान से मिलती है

कोई कल कह रहा था(मुक्तक)

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कोई कल कह रहा था तुम मेरी ही बात करते हो ज़माना बीत गया किस्सों को फिर भी याद करते हो जो तुम्हारे सामने था वो तुमने देखा नहीं तब तो अब तन्हाई में रो रो कर खुद को बर्बाद करते हो. जो ये पैगाम मैंने पालिया तुमसे मैं कहता हूँ चले आओ मेरे ही पास ये उम्मीद करता हूँ मैं सबकुछ भूल जाऊंगा मोहब्बत में तलक अब भी तेरे आँसू की कीमत आज भी बस मैं समझता हूँ. तेरे खोने में जो खोना है वो मेरा ही खोना है तुम्हारे साथ जो गुजरेगा वो मेरा भी होना है जुड़ी हैं इस तरह साँसे लिपट कल की तरह अब भी मेरे दिल के महल में आज भी तेरा ही कोना है. मुझे बर्बाद करके भी कहीं आबाद रहते हो सुना था कल किसी से कि जिन्दाबाद रहते हो ये कैसी रहमतें दि हैं मोहब्बत के फ़साने में मैं सब कुछ भूल भी जाऊँ मगर तुम याद रहते हो.

हर तारीख पुरानी

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हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है न भूल सका अभी एहसास दिला जाती है हर बार मेरा इतिहास मेरे आज से जीत जाता है घंटों मुझे गहराई में डूबा जाती है हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है . जब घटा तो न था पता इतना सताएगा ये पल कि इतनी मुश्किल होगी कोई ढूँढने में हल सारे मंजर के सामने नजर थम सी जाती है उस लम्हे को अरसे बाद भी करीब पाती है हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है . कोई अहम् बात से न है इसका वास्ता न कोई एक है हर एक इसका राश्ता ये तो हर एक घड़ी का हिसाब थमा जाती है कई आम हस्ती को खास बना जाती है हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है . इतना अजीज न था जो मेरे अतीत में वर्तमान में वो भी है मेरे प्रतीत में जाने कब कौनसी घटना रुला जाती है मुझे अधूरे होने का फरमान सुना जाती है हर तारीख पुरानी याद जगा जाती है कल को अभी से बेहतर हर बार बता जाती है .