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एक पगली याद बहुत ही आती है

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जब यारों की महफ़िल में अचानक छिड़े चर्चा मोहब्बत बाली, या फिर नुक्कड़ बस्ती दूर गली में कोई दिखती है भोली भाली, करूँ जतन पर,दिल पर मेरे छुरियाँ सी चल जाती हैं सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है एक नाम जो,तीरथ था मेरा एक गली जो,काशी मथुरा थी अब कहाँ रहे वो मंजर सारे हर ख़्वाहिश भी,कतरा-कतरा थी भूले भटके कभी कहीं से उसकी तस्वीर अगर मिल जाती है सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है प्रेम प्रसंग पर,कोई फ़िल्म हो या मम्मी दीदी वाले नाटक वधु चरित्र वाली हर लड़की खोले अतीत वाले फाटक तब हृदय वेदना,और अश्क़ों को झूठी,मुस्कान मेरी छल जाती है सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है पाया था,मैंने भी उसको मन्नतों के लंबे,समर लड़कर हर आहट पर,सजदा था मेरा थामा था उसको,गिर पड़कर अब मैं नहीं!तो फिर कौन? किसको?मेरा हल बनाती है? सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है जज्बातों को जरा सजा दूँ गज़ल कोई बन जाती है सब कहते हैं मैं लिखता हूँ पर अर्थ तो वो ही लाती है नींद सुकून उम्मीदें स्वाहा गर फ़िक्र तेरी पल जाती है सच कहता हूँ,तू पगली मुझको या...

अपने उस गाँव में

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पीपल की छाँव में अपने उस गाँव में सकरी और उजड़ी पर दिलकश उन राहों में टूटे से घर में जलती दोपहर में छिपते छिपाते दिल के शहर में क्या अब भी कोई सुबह शाम से मिलती है राधा कोई क्या घनश्याम से मिलती है जमुना के कोई मुहाने की दस्तक होती है दिल के किबाड़ों पे अब तक इठलाते मौसम और मोहब्बत के किस्से कब तक अकेले सिलूँ मैं वो हिस्से तुम भी लिखो और मुझको बता दो जेठ की आंधी अब भी क्या तूफ़ान से मिलती है बड़े जतन कर सबरी क्या श्री राम से मिलती है वो मिलजुल के रहना सराफत का गहना हर एक आपदा को सदा साथ सहना वो ईद और दीवाली जो संग संग मनायीं यहाँ खीर पूरी वहाँ सेवइयां थी खायीं यहाँ मुझको वैसा न दिखता समर्पण टूटा हुआ सा अब मेरा है दर्पण वहाँ क्या अब भी गीता कभी कुरान से मिलती है सभी बंधन भूल आरती क्या अजान से मिलती है

जितना है याद तुम्हें

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जितना अब तक है याद तुम्हें, मैं उतना भूल आया हूँ तुमने हर राह दिये थे काँटे, मगर मैं फूल लाया हूँ जिन गलियों की अमर कहानी, जिनकी यादें पानी पानी कुछ बची है शब्दों में मेरे, उन गलियों की धूल लाया हूँ कुछ भ्रम थे मेरे टूट गए थे, जब अपने ही रूठ गए थे जब मैं बदला और वो बदले, कुछ बदले हुए उसूल लाया हूँ जो ख़त रह गए अनखोले से, जो बोल रहे अनबोले से जो बाकी है अब तक संदेशे, एसे ही फिजूल लाया हूँ जहाँ पढ़े थे प्रेम विषय पर, सब वारा था एक विजय पर एहसासों के ऐसे पावन, मैं यादों के स्कूल लाया हूँ जितना अब तक है याद तुम्हें, मैं उतना भूल आया हूँ तुमने हर राह दिये थे काँटे, मगर मैं फूल लाया हूँ

तुझे जो पालिया हमने(मुक्तक-a sad heart)

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तुझे जो पालिया हमने तमन्ना कुछ नहीं हमको तुझे जो खोदिया हमने गिला भी कुछ नहीं हमको जो पाया था वो खोया है इसमें अफ़सोस कैसा है मगर दिल से मेरे पूछो सिला ये क्यूँ मिला हमको. मैं तेरा हूँ तू मेरी है फिर क्यूँ इनकार करती है खुदी में चूर है इतना खुदी पर बार करती है मैं प्यासा हूँ समुन्दर होकर भी इक बूँद का यारो तू समां ऐ इश्क मैं परवाने को क्यूँ बर्बाद करती है. जो मेरी आँखों का पानी है मोहब्बत की निशानी है जो तू छूले तो सागर है जो छलका दूँ कहानी है मोहब्बत का हर एक पल मेरे दिल में बसा अब तक इश्क माना गमजदा है मगर फिर भी रूमानी है. जमाने भर की खुशियाँ फिर तेरे क़दमों में लाया हूँ तेरे दिल में बसा है जो वही फिर दौर लाया हूँ मैं तुझसे पूछता हूँ ये बता मेरी खता क्या थी मैं मिटकर भी तेरी खातिर संबर कर आज आया हूँ.

मेरी जाना मेरी जाना(My Love)

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मेरी जाना मेरी जाना मैं जब पीछे देखता हूँ तुम्हारा अक्श बनता है मैं जब तन्हाइयों में खुदसे ही बातें करता हूँ तुम्हारा जिक्र चलता है कोई भीनी सी खुशबु जब हवा में डोलती है तुम्हारा इत्र उढ़ता है मैं जब आँखों को अपनी मूंदता हूँ तुम्हारा रूप खिलता है . मेरी रातें मेरी रातें जब जब रत जागों में डूब जाती हैं तुम्हारा दर्द पलता है मैं जब बीते पलों में झांकता हूँ तेरी यादों को जब भी तंकता हूँ दबा जज्बात का खामोश दरिया बह निकलता है तेरी आवाज तेरी आवाज जब मेरे जहन में गूँज जाती है मेरा दिल फिर मचलता है॰ सुनो जाना सुनो जाना तुम्हें कैसे बताऊँ बड़े जतनों से फिर ये दिल संभलता है मेरी खामोशियाँ मेरी खामोशियाँ दिल को मेरे जब चीर जाती हैं मेरी तन्हैयाँ तेरे लिए आँसू ब हा ती हैं फिजाएँ रूठ जाती हैं हर एक तमन्ना टूट जाती हैं गर आज भी तू मुझको कही नाराज मिलता है मेरे जीने में मेरे जीने में तेरी यादों ...