मेरे बारे में

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बड़े आसान से शब्दों में लिख डाली कहानी है
जो मेरे साथ है गुजरा वही मेरी जुबानी है
मैं तुमसे क्या कहूँ मैं ही नहीं समझा मोहब्बत
को मेरे ऐहसास के सावन में बस यादों का पानी है

शनिवार, जून 29

ख्वाहिशों के दामन में...............



                     



ख्वाहिशों के दामन में ख्वाब ऐसे पले हैं
एक भूल की सजा सदियों तक जले हैं

मेरी पुकार को नाकारा गया हर बार यूँ
अब निर्दोष होकर भी लबों को सिले हैं

मजबूरों पर सितम ढाते हैं छोटी सोच वाले
गरीबों की वस्ती में बस आँसू चले हैं

लोगों की फितरत में इंसानियत कहाँ हैं
चमक धमक की खातिर अपनों को छले हैं

मौला तेरी भी कुदरत ने निर्बल को झुकाया है
समुन्दर से जाकर सदा दरिया ही मिले हैं

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